गांधीजी की ये 7 सीख,आप भी कर सकते हैं फॉलो 

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अहिंसा (अहिंसा): अहिंसा यानी अहिंसा, गांधी जी का मूल मंत्र था। उनका मानना था कि समस्याओं का समाधान शांति और प्रेम में है, न कि हिंसा और आलोचना में।

सत्य: गांधी जी ने सत्य को अपने जीवन का एक महत्व पूर्ण हिसा बनाया। उनका कहना था कि सत्य हमेशा जीता है और इसे अपनाना हमारी आध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है।

अस्तेय: अस्तेय का अर्थ है चोरी न करना या किसी अन्य की संपत्ति में अक्रमण नहीं करना। ये समाज में इमानदारी और व्यवहार में सच्ची को अपनी शिक्षा देता है।

ब्रह्मचर्य : ये ब्रह्मचर्य और आत्म-नियंत्रण का पालन है। गांधी जी ने ब्रह्मचर्य को अपनाया और ये उनकी आत्म-समर्पिता और आत्म-अनुशासन को दर्शाता है।

अपरिग्रह : अपरिग्रह का मूल अर्थ अपरिग्रह संपत्ति का त्याग है। गांधी जी ने सरल और अपरिमन जीवन जीने की शिक्षा दी और अत्याधिक संपत्ति का नाश करने की समझ।

सर्वोदय : गांधी जी का मानना था कि सभी लोगों की प्रगति और समृद्धि से समाज की प्रगति होती है। उनका उदेश्य समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा देना था।

स्वदेशी : स्वदेशी आंदोलन का प्रचार किया और स्वदेशी वस्त्रों का उपयोग करने की प्रोत्साहन दी। इस देश की आर्थिक उन्नति में सुधार हुआ और स्वतंत्रता के मार्ग को तय किया गया।

स्वदेशी : स्वदेशी आंदोलन का प्रचार किया और स्वदेशी वस्त्रों का उपयोग करने की प्रोत्साहन दी। इस देश की आर्थिक उन्नति में सुधार हुआ और स्वतंत्रता के मार्ग को तय किया गया।